राष्ट्रीय समसामयिकी 3(8-November-2023)
लोअर सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना
(Lower Subansiri Hydroelectric Project)

Posted on November 8th, 2023 | Create PDF File

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लोअर सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना भारत में निर्माणाधीन सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है, भूस्खलन के कारण इस परियोजना की एकमात्र कार्यात्मक डायवर्ज़न सुरंग अवरुद्ध हो गई तथा बाँध के निचले हिस्से की ओर जल प्रवाह बाधित हो गया। इसका सुबनसिरी नदी, जो कि ब्रह्मपुत्र की एक प्रमुख सहायक नदी है, पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

 

इसके परिणामस्वरूप नदी तल सूख गया एवं जलीय जीवन खतरे में पड़ गया। इस घटना ने परियोजना की सुरक्षा व व्यवहार्यता पर भी सवाल उठाए, जिसे वर्ष 2005 में अपनी स्थापना के बाद से कई बार देरी और विरोध का सामना करना पड़ा है।

 

लोअर सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना :

 

लोअर सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना, एक रन-ऑफ-रिवर योजना है जिसका लक्ष्य अरुणाचल प्रदेश तथा असम की सीमा पर बहने वाली सुबनसिरी नदी की क्षमता का दोहन करके 2,000 मेगावाट बिजली उत्पन्न करना है।

 

रन-ऑफ-रिवर बाँध वह होता है जिसमें बाँध के नीचे की ओर नदी में जल का प्रवाह बाँध के ऊपर की ओर जल के प्रवाह के समान होता है।

 

इस परियोजना का क्रियान्वयन राष्ट्रीय जलविद्युत ऊर्जा निगम (NHPC) द्वारा किया जा रहा है।

 

इस परियोजना में 116 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी (गुरुत्त्व) बाँध, 34.5 किलोमीटर लंबा जलाशय, पाँच डायवर्ज़न सुरंगें, आठ स्पिलवे एवं आठ 250 मेगावाट इकाइयों वाला एक बिजलीघर का निर्माण शामिल है।

 

ग्रेविटी बाँध का निर्माण कंक्रीट या सीमेंट से किया जाता है, इसे मुख्य रूप से सामग्री के वज़न का उपयोग करके जल को रोकने के लिये डिज़ाइन किया गया है ताकि जल के क्षैतिज दबाव का रोका जा सके।

 

90% विश्वसनीयता के साथ एक वर्ष में इस परियोजना से लगभग 7,500 मिलियन यूनिट बिजली उत्पन्न होने की अपेक्षा है।

 

इस परियोजना से निचले इलाकों में बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और पीने के पानी का लाभ मिलने की भी उम्मीद है।

 

सुबनसिरी नदी :

 

सुबनसिरी, या "स्वर्ण नदी" ऊपरी ब्रह्मपुत्र नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।

 

तिब्बती हिमालय से निकलकर यह नदी अरुणाचल प्रदेश की मिरी पहाड़ियों से होकर भारत में प्रवाहित होती है तथा इसकी स्थलाकृतिक विशेषता क्षेत्र में जलविद्युत क्षमता के दोहन का अवसर प्रदान करती है।