कला एवं संस्कृति समसामयिकी 1 (9-September-2021)
यक्षगान
(Yakshagana)

Posted on September 9th, 2021 | Create PDF File

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पहली बार ओटीटी प्लेटफॉर्म पर यक्षगान प्रस्तुत किया जाने वाला है, जिसमें सारे किरदार एक ही व्यक्ति द्वारा प्रदर्शित किये जायेंगे।

 

यक्षगान कर्नाटक की पारंपरिक नृत्य नाट्य शैली है। इसकी विषयवस्तु पौराणिक धार्मिक कक्षायें हैं। इन्हीं पौराणिक कथाओं को भाव के रूप में व्यक्त करने के लिये कथावस्तु में गीत एवं संगीत को जोड़ा जाता है।

 

कलाकारों का भव्य एवं भड़कीला श्रृंगार किया जाता है इनके आभूषण लकड़ी के बने होते हैं जिन्हें शीशे एवं सुनहरे कागजों से सजाया जाता है।

 

इसमें चैंड, चुंगी, हारमोनियम, झाँझ जैसे वाद्ययंत्रें का प्रयोग होता है।

 

यक्षगान की परंपरा लगभग 800 वर्ष पुरानी है। इसमें संगीत की अपनी एक विशिष्ट शैली है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत कर्नाटक और हिंदुस्तानी शैली दोनों से अलग है।

 

यह संगीत, नृत्य, भाषण और वेशभूषा का एक समृद्ध कलात्मक मिश्रण है, इस कला में संगीत नाटक के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और जन मनोरंजन जैसी विशेषताओं को भी महत्त्व दिया जाता है।

 

यक्षगान की कई समानांतर शैलियाँ है जिनकी प्रस्तुति आन्ध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में की जाती है।