राज्य समसामयिकी 1 (23-July-2021)
गाँव बूरा: असम
(The Gaon Buras)

Posted on July 23rd, 2021 | Create PDF File

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हाल ही में असम मंत्रिमंडल ने घोषणा की है कि ज़िला प्रशासन के ग्राम स्तर के अधिकारी जिन्हें ‘गाँव बूरा’ कहा जाता है, को अब 'गाँव प्रधान' कहा जाएगा।

 

सरकार ने तर्क दिया है कि कई युवा पुरुष (और महिलाएँ) ‘गाँव बूरा’ बन रहे हैं, इसलिये 'बूरा' (‘असमी’ भाषा में जिसका अर्थ है ‘पुराना’) शब्द अब उपयुक्त नहीं है।

 

‘गाँव बूरा’ :

‘गाँव बूरा’, ग्राम प्रधान होते हैं। वे ग्राम स्तर पर ज़िला प्रशासन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

असम में करीब 6,000 ‘गाँव बूरा’ हैं। ‘गाँव बूरा' के रूप में महिलाओं का चुना जाना बहुत आम नहीं हैं और अक्सर पति की मृत्यु के बाद वे यह पद संभाल लेती हैं।

 

इतिहास :

यह एक औपनिवेशिक युग की व्यवस्था है, तब अंग्रेज़ अधिकारियों द्वारा गाँव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति को मुखिया के रूप में नियुक्त किया जाता था, जो एक विशेष क्षेत्र में भूमि और राजस्व से संबंधित मामलों की देखरेख करते थे।

 

स्वतंत्रता के बाद भी सरकार ने ‘गाँव बूरा’ की व्यवस्था को जारी रखा और ‘गाँव बूरा’ को असम राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का औपचारिक हिस्सा बना दिया गया, साथ ही उनकी ज़िम्मेदारियों को भी बढ़ा दिया तथा उनकी भूमिका के लिये उन्हें एक छोटा मानदेय भी दिया जाने लगा।

 

अरुणाचल प्रदेश में भी ‘गाँव बूरा’ सबसे महत्त्वपूर्ण ग्राम स्तर के पदाधिकारी हैं।

 

कर्तव्य:

 

गाँव के जनसंख्या रजिस्टर को व्यवस्थित रखना, भूमि अभिलेखों का रखरखाव, पुलिस को अपराध की जाँच में मदद करना आदि।

 

इसमें अब गाँव में कोविड-19 मामलों का विवरण रखना, टीकाकरण शिविर आयोजित करना, चुनाव के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों के रूप में कार्य करना आदि शामिल हैं।

 

'गाँव बूरा प्रमाण पत्र' (Gaon Bura Certificate) जारी करना। यह एक ऐसा प्रमाण पत्र है जो किसी विशेष गाँव में स्थायी निवास को प्रमाणित करता है।

 

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया के दौरान महिलाओं के लिये अपने पति और माता-पिता के साथ संबंध स्थापित करना आवश्यक हो गया।