पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी समसामयिकी 1 (12-January-2022)
दीर्घस्‍थायी कार्बनिक प्रदूषकों पर स्टॉकहोम अभिसमय
(Stockholm Convention on Sustainable Organic Pollutants)

Posted on January 12th, 2022 | Create PDF File

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यूरोपीय आयोग ने पुनर्नवीनीकरण उत्पादों, स्वास्थ्य और पर्यावरण में संदूषण की समस्या से निपटने के लिए ‘दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों’ (Persistent Organic Pollutants – POPs) के लिए एक सख्त सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया है।

 

स्थायी कार्बनिक प्रदूषक’ (POPs) क्या हैं?

 

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा ‘दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों’ (POPs) को “पर्यावरण में दीर्घकाल तक मौजूद रहने वाले, खाद्य श्रंखला के माध्यम से जैव-संचित होने वाले, तथा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पैदा करने का जोखिम पैदा करने वाले रासायनिक पदार्थों” के रूप में परिभाषित किया गया है।

 

वर्ष 1995 में, UNEP की गवर्निंग काउंसिल द्वारा ‘दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों’ (Persistent Organic Pollutants – POPs) पर वैश्विक कार्रवाई करने का आह्वान किया गया था।

 

POPs की विशिष्टता :

 

दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषक’ (POPs) वसारागी / ‘लिपोफिलिक’ (Lipophilic) होते हैं, अर्थात ये जीवित जानवरों और मनुष्यों के वसायुक्त ऊतकों में जमा होते हैं।

 

वसायुक्त ऊतकों (fatty tissue) में, इनकी सांद्रता पृष्ठभूमि स्तरों की तुलना में 70,000 गुना अधिक तक बढ़ सकती है।

 

जैसे-जैसे आप खाद्य श्रृंखला में आगे बढ़ते हैं, पीओपी (POPs) की सांद्रता बढ़ती जाती है, इसी कारणवश खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर रहने वाले जानवर जैसे मछली, शिकारी पक्षी, स्तनधारी और मनुष्य इन रसायनों की सर्वाधिक सांद्रता पायी जाती हैं।

 

दीर्घस्‍थायी कार्बनिक प्रदूषकों पर स्टॉकहोम कन्वेंशन:

 

‘स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों पर स्टॉकहोम कन्वेंशन’ (Stockholm Convention on POPs), मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को POPs से बचाने के लिये एक वैश्विक संधि है।

 

इस अभिसमय पर वर्ष 2001 में हस्ताक्षर किए गए थे तथा यह न्यूनतम 50 हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्रों द्वारा अनुसमर्थन के नब्बे दिन बाद मई 2004 से प्रभावी हुआ था।

 

इसका लक्ष्य, स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों (पीओपी) के उत्पादन और उपयोग को खत्म करना या प्रतिबंधित करना है।

 

स्टॉकहोम कन्वेंशन कानूनी रूप से बाध्यकारी है। स्टॉकहोम कन्वेंशन के अनुच्छेद 16 के तहत, अभिसमय द्वारा अपनाए गए उपायों की प्रभावशीलता का नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाना अनिवार्य किया गया है।

 

POPs के स्रोत :

 

कृषि रसायनों और औद्योगिक रसायनों का अनुचित उपयोग और/या निपटान।

 

उच्च तापमान और दहन प्रक्रियाएं।

 

औद्योगिक प्रक्रियाओं या दहन के अवांछित उपोत्पाद।

 

पीओपी से संबंधित अन्य अभिसमय :

 

लंबी दूरी के सीमा-पारीय वायु प्रदूषकों पर कन्वेंशन (Convention on Long-Range Transboundary Air Pollutants – LRTAP) तथा दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों (POPs) पर प्रोटोकॉल, पीओपी से संबंधित अन्य अभिसमय हैं।

 

हालिया परिवर्तन :

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दीर्घस्‍थायी कार्बनिक प्रदूषकों (POPs) पर स्टॉकहोम अभिसमय में सूचीबद्ध सात रसायनों के सत्‍यापन की मंजूरी दे दी है।

 

य़े सात रसायन निम्नलिखित हैं :

 

क्लोरडेकोन (Chlordecone)

 

हेक्साब्रोमो बाईफिनाइल (Hexabromobiphenyl)

 

हेक्साब्रोमो डाईफिनाइल ईथर एवं हेप्टाब्रोमो डाईफिनाइल ईथर (Hexabromo diphenyl ether and Heptabromo diphenyl ether)

 

टेट्राब्रोमो डाईफिनाइल ईथर एवं पेंटाब्रोमो डाईफिनाइल ईथर (Tetrabromo diphenyl ether and Pentabromo diphenyl ether)

 

पेंटाक्लोरो बेंज़ीन (Penta chlorobenzene)

 

हेक्साब्रोमो साइक्लोडोडेकेन (Hexabromocyclododecane)

 

हेक्साक्लोरो ब्यूटाडाइन (Hexachlorobutadiene)

 

भारत के लिए लाभ :

 

सत्‍यापन प्रक्रिया भारत को राष्ट्रीय कार्यान्वयन योजना (NIP) को आधुनिक बनाने में वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) वित्तीय संसाधनों तक पहुंचने में सक्षम बनाएगी।