स्वास्थ्य समसामयिकी 1 (20-July-2021)
मंकी बी वायरस
(Monkey B Virus)

Posted on July 20th, 2021 | Create PDF File

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हाल ही में चीन में मंकी बी वायरस (Monkey B virus) से मानव के संक्रमित होने का पहला मामला सामने आया है।

 

मंकी बी वायरस :

मंकी बी वायरस मैकाक बंदरों में पाया जाने वाला अल्फाहर्पीसवायरस एनज़ूटिक (Alphaherpesvirus Enzootic) यानी यह मूल रूप से इनमें पाया जाता है और सर्वप्रथम इसकी पहचान वर्ष 1932 में की गई थी।

 

अल्फाहर्पीसवायरस रोगजनक या न्यूरोइनवेसिव वायरस हैं जो मनुष्यों और अन्य कशेरुकियों के परिधीय तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को संक्रमित करते हैं।

 

बी वायरस को आमतौर पर हर्पीज बी (Herpes B), हर्पीसवायरस सिमिया (Herpesvirus Simiae) और हर्पीसवायरस बी(Herpesvirus B) के रूप में भी जाना जाता है।

 

बी वायरस सतह (खासकर नम सतह) पर घंटों तक जीवित रह सकता है।

 

संचरण:

इंसानों में यह वायरस मैकाक बंदरों के काटने, खरोंचने या संक्रमित बंदर की लार, मल-मूत्र आदि के संपर्क में आने से भी फैलता है और इसके संक्रमण के कारण होने वाली वाली मृत्यु दर 70% से 80% है।

 

मानव-से-मानव में संचरण: अब तक एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बी वायरस के संचरण/प्रसार का केवल एक मामला दर्ज किया गया है।

 

लक्षण:

 

इस वायरस के प्रारंभिक लक्षण फ्लू जैसे होते हैं जैसे- बुखार और ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, थकान तथा सिरदर्द आदि, जिसके बाद संक्रमित व्यक्ति को घाव या शरीर की त्वचा पर छोटे-छाले हो जाते हैं।

 

इस वायरस के प्रारंभिक लक्षणों के बाद मांसपेशियों में अकड़न और तंत्रिका संबंधी क्षति होती है।

 

उपचार:

 

वर्तमान में इसका कोई भी टीका उपलब्ध नहीं है जो इसके संक्रमण से बचा सके।

 

समय पर एंटीवायरल दवाएँ इसके जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।