पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी समसामियिकी 2 (22-Feb-2021)
जिम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व
(Jim Corbett Tiger Reserve)

Posted on February 22nd, 2021 | Create PDF File

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हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड वन विभाग के 23 दिसंबर, 2020 के आदेश पर रोक लगा दिया है जिसके तहत जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र (Core Zone) में बसों के संचालन के हेतु निजी मोटर मालिकों को अनुमति दी गयी थी।इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने केंद्र, उत्तराखंड सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और बाघ रिजर्व के अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए उनकी प्रतिक्रिया मांगी है।उल्लेखनीय है कि जिम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और सोननदी वन्यजीव अभयारण्य से मिलकर बना है।

 


उत्तराखंड वन विभाग ने 23 दिसंबर, 2020 के एक आदेश द्वारा जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बसों के संचालन हेतु निजी मोटर मालिकों को अनुमति दी गयी थी । इस आदेश के विरोध में अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल द्वारा याचिका दायर की गयी थी।याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा कि यह आदेश वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 का उल्लंघन है एवं इस आदेश द्वारा राष्ट्रीय पशु - बाघ की सुरक्षा, आश्रय और संरक्षण" के साथ भी समझौता किया गया है।याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, “टाइगर रिज़र्व को गैर-पारिस्थितिक उपयोग हेतु डायवर्ट नहीं किया जा सकता और यदि ऐसा करना आवश्यक हो तो उत्तराखंड राज्य और इसके वन विभाग के अधिकारियों को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की सलाह पर नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ से मंजूरी लेना होगा।” याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्तमान मामले में, वन अधिकारियों ने न तो राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से मंजूरी ली और न ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से सलाह ली है।

 


क्या होता है कोर क्षेत्र (Core Zone)?


बायोस्फीयर अथवा जैवमंडल रिज़र्व (Biosphere Reserves) में वन्यजीवों एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, रखरखाव, प्रबंधन या पुनर्स्थापना इन-सीटू संरक्षण (In-situ Conservation) विधि के तहत किया जाता है।इन-सीटू संरक्षण (In-situ Conservation) को तीन भागों में विभाजित किया जाता है- कोर क्षेत्र (Core Zone), बफर क्षेत्र (Buffer Zone) और संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone)।कोर क्षेत्र में संरक्षित क्षेत्र शामिल होता हैं क्योंकि वे बायोस्फियर रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन कोर क्षेत्रों में बायोस्फीयर रिजर्व का पारिस्थितिकी तंत्र प्राकृतिक रूप में पाए जाते हैं। कोर क्षेत्र में प्राकृतिक वास्तविक जंगल पाए जाते हैं और कोर क्षेत्र के अंदर कोई गांव या मानवीय बसावट नहीं होता हैं। कोर क्षेत्र एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होता है जहाँ वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को वन विभाग द्वारा कड़े मानको से संरक्षित किया जाता है। कोर क्षेत्र (Core Zone), काफी संवेदनशील होता है,यहाँ मानवीय गतिविधियों की अनुमति नहीं है।बफर क्षेत्र (Buffer Zone), कोर क्षेत्र और संक्रमण क्षेत्र के बीच में स्थित होता है। यहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुमति दी जाती है।संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone), बायोस्फीयर रिजर्व का सबसे बाहरी हिस्सा है। यह सामान्यत: एक सीमांकित क्षेत्र नहीं बल्कि सहयोगात्मक क्षेत्र है। इस क्षेत्र के अंतर्गत मानव बस्तियां, फसल भूमि, प्रबंधित जंगल, मनोरंजन का क्षेत्र और अन्य आर्थिक उपयोग वाले क्षेत्र शामिल हैं।

 


जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क एवं जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के बारे में-


भारत में पहला राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 1936 में हैली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था, जिसे वर्तमान में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड के रूप में जाना जाता है। 1957 में महान प्रकृतिवादी, प्रख्यात संरक्षणवादी स्वर्गीय जिम कॉर्बेट की याद में पार्क को कॉर्बेट नेशनल पार्क के रूप में परिवर्तित किया गया।जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व दो वन्य जीव क्षेत्रों सोननदी वन्यजीव अभयारण्य और जिम कार्बेट नेशनल पार्क के क्षेत्रों से मिलकर बना हुआ है। यह टाइगर रिजर्व उत्तराखंड के 3 जिलों पौड़ी, नैनीताल और अल्मोड़ा में फैला हुआ है।रॉयल बंगाल टाइगर की सुरक्षा के लिए 1973 में लांच किए गए प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत यहीं से हुई थी।इस क्षेत्र से रामगंगा, सोननदी, मंडल, पलैन और कोसी जैसी प्रमुख नदियाँ बहती है जो जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क को जल संसाधन उपलब्ध करवाती हैं। इस क्षेत्र में कई लुप्तप्राय प्रजातियों समेत वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां पाई जाने वाली वन्य जीव प्रजातियों में 50 स्तनपायी प्रजातियां, 549 पक्षी प्रजातियां और 26 सरीसृप प्रजातियां शामिल हैं।