अर्थव्यवस्था समसामयिकी 1 (7-Apr-2021)
भारत द्वारा ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर की बैठक की मेजबानी
(India hosts meeting of BRICS finance ministers and governors of central banks)

Posted on April 7th, 2021 | Create PDF File

hlhiuj

हाल ही में भारत ने ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर की बैठक की मेजबानी की है। भारत ने 6 अप्रैल 2021 को ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर की पहली बैठक की वर्चुअल मेजबानी की है।

 

उक्त बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांता दास ने संयुक्त रूप से की है। इसके अतिरिक्त, इस बैठक में ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्री और उनके केंद्रीय बैंकों के गवर्नर शामिल थे।

2021 में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की यह पहली बैठक है।

 

बैठक के दौरान ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों गवर्नरों ने 2021 के लिए भारत द्वारा निर्धारित वित्तीय सहयोग एजेंडे पर चर्चा की है। इसके तहत वैश्विक आर्थिक आउटलुक और कोविड-19 महामारी का असर, न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) की गतिविधियां, सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी का उपयोग, सीमा शुल्क से संबंधित मुद्दों पर सहयोग, आईएमएफ में सुधार, एसएमई के लिए फिनटेक और वित्तीय समावेशन, ब्रिक्स रैपिड सूचना सुरक्षा चैनल और ब्रिक्स बॉन्ड फंड पर चर्चा की गई है।

 

उल्लेखनीय है कि 2021 में ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत का जोर ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, उसमें निरंतरता लाने, संबंधों को मजबूत करने और आम सहमति बनाने पर है।

 

ब्रिक्स (BRICS) :

ब्रिक्स देशों की कल्पना वर्ष 2001 में सर्वप्रथम गोल्डमैन सैक (Goldman Sachs) के अर्थशास्त्री जिम ओ नील ने अपने शोधपत्र ‘बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स’ में किया था। इस कल्पना में ब्राजील, भारत और चीन शामिल थे।

 

ब्रिक्स दुनिया की पाँच सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बना एक समूह है। दरअसल ब्रिक्स इन पांचों देशों के नाम के पहले अक्षर B, R, I, C, S के लिये प्रयोग किया जाने वाला एक संक्षिप्त शब्द है।

 

इसकी औपचारिक स्थापना जुलाई 2006 में रूस के सेंट्स पीटर्सबर्ग में जी-8 देशों के सम्मेलन के अवसर पर रूस, भारत और चीन के नेताओं की बैठक के बाद हुई। बाद में, सितंबर 2006 में न्यूयॉर्क में UNGA की एक बैठक के (बैठक से इतर) अवसर पर BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई और इसी में BRIC की औपचारिक शुरुआत हुई।

 

पहले ब्रिक सम्मेलन का आयोजन 16 जून, 2009 को रूस के येकतेरिनबर्ग में हुआ था। दिसंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को BRIC में शामिल होने का न्यौता दिया गया और वर्ष 2011 में चीन के सान्या में आयोजित ब्रिक्स (BRIC) के तीसरे सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ और यहीं से ब्रिक्स (BRICS) देशों के बहुपक्षीय संबंधों की शुरूआत हुई।

 

भारत के लिए ब्रिक्स का महत्व :

वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका, चीन और रूस एक दूसरे के लिये न केवल आर्थिक प्रतिद्वन्दी हैं बल्कि वैचारिक रूप से भी इनमें काफी भिन्नता है। वैश्विक बाजार में इन तीनों देशों की पकड़ बहुत मजबूत है। हाल ही में अमेरिका और रूस के बढ़ते विवाद के कारण कई तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं। अतः भारत इन जटिल संबंधों को सुलझाने के लिए एक मंच के रूप में ब्रिक्स का उपयोग कर सकता है।

 

अमेरिका ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवरसीरीज थ्रू सैक्शन एक्ट’ का हवाला देते हुए, भारत को रूस से एस-400 मिसाइल न खरीदने का दबाव बनाता है अतः अमेरिकी दबाव के प्रतिरोध में भारत ब्रिक्स के मंच का उपयोग कर सकता है।

 

ईरान से कच्चे तेल की खरीद ना करने के अमेरिकी दबाव के अलावा भारत तथा चीन पर प्रतिवर्ष बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के उल्लंघन के अमेरिका के आरोपों के विरोध में भारत स्वयं को कूटनीतिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिये ब्रिक्स देशों की सहायता प्राप्त कर सकता है।

 

वैश्विक भू-राजनीतिक संबंधों के माध्यम से भारत चीन और रूस के गठबंधन को ना केवल संतुलित कर सकता है बल्कि इसके जरिए वह अमेरिकी दबाव को भी दूर कर सकता है।

 

भारत को अपने सेवा क्षेत्र के लिये जिस प्रकार के बाजार की आवश्यकता है उसके लिए ब्रिक्स समूह बेहतर प्लेटफार्म है।

 

ब्रिक्स के जरिए भारत वैश्विक वित्तीय और वाणिज्यिक संस्थानों में सुधार हेतु दबाव डाल सकता है जिससे वैश्विक वित्तीय स्थिरता और वित्तीय नियमों का पूरे विश्व में सुगम परिचालन हो सके।

 

भारत जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद इत्यादि की दिशा में एक स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ उचित कार्रवाई की दिशा में ब्रिक्स एक उचित मंच साबित हो सकता है।

 

गरीबी और भुखमरी को समाप्त कर असमानता को दूर करने में ब्रिक्स का मंच भारत के लिए उपयोगी हो सकता है।