42वां संशोधन अधिनियम, 1976 (Forty-second Constitutional Amendment, 1976)

Posted on May 16th, 2022 | Create PDF File

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42वां संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान के संशोधित प्रावधान-

 

1.तीन नए शब्द जोड़ गए (समाजवादी, धर्म निरपेक्ष एवं (सबसे महत्वपूर्ण संशोधन इसे लघु संविधान के रूप में अखंडता) जाना जाता है। इससे स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों को प्रभावी बनाया)

 

2.नागरिकों द्वारा मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया (नया भाग IVक)

 

3.राष्ट्रपति को कैबिनेट की सलाह के लिए बाध्यता।

 

4.प्रशासनिक अधिकरणों एवं अन्य मामलों पर अधिकरणों की व्यवस्था (भाग XIIV क जोड़ा  गया)

 

5.1971 की जनगणना के आधार पर 2001 तक लोकसभा सीटों एवं राज्य विधानसभा सीटों को निश्चित किया गया।

 

6.सांविधानिक संशोधन को न्यायिक जांच से बाहर किया गया।

 

7.न्यायिक समीक्षा एवं रिट न्यायक्षेत्र में उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों की शक्ति में कटौती।

 

8.लोकसभा एवं विधानसभा के कार्यकाल में 5 से 6 वर्ग की बढ़ोतरी।

 

9.निदेशक तत्वों के कार्यान्वयन हेतु बनाई गई विधियों को न्यायालय द्वारा इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि ये कुछ मूल अधिकारों का उल्लंघन हैं।

 

10.संसद को राष्ट्र विरोधी कार्यकलापों के संबंध में कार्यवाही करने के लिए विधियां बनाने की शक्ति प्रदान की गयी और ऐसी विधियां मूल अधिकारों पर अभिभावी होंगी।

 

11.तीन नए निदेशक तत्व जोड़े गए अर्थात समान न्याय और निशुल्क विधिक सहायता, उद्योगों के प्रबंध में कर्मकारों का भाग लेना, पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा।

 

12.भारत के किसी एक भाग में राष्ट्रीय आपदा की घोषणा।

 

13.राज्य में राष्ट्रपति शासन के कार्यकाल में एक बार में छह माह से एक साल तक बढ़ोतरी।

 

14.केंद्र को किसी राज्य में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्य बल भेजने की शक्ति।

 

15.पांच विषयों का राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरण, जैसे-शिक्षा, वन, वन्य जीवों एवं पक्षियों का संरक्षण, नाप-तौल और न्याय प्रशासन एवं उच्चतम और उच्चन्यायालय के अलावा सभी न्यायालयों का गठन और संगठन।

 

16.संसद और विधानमंडल में कोरम की आवश्यकता की समाप्ति।

 

17.संसद को यह निर्णय लेने में शक्ति प्रदान की कि समय-समय पर अपने सदस्यों एवं समितियों के अधिकार एवं विशेषाधिकारों का निर्धारण करे।

 

18.अखिल भारतीय विधिक सेवा के निर्माण की व्यवस्था।

 

19.सिविल सेवक को दूसरे चरण पर जांच के उपरांत प्रतिवेदन के अधिकार को समाप्त कर अनुशासनात्मक कार्यवाही को छोटा किया गया (प्रस्तावित दण्ड के मामले में)